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| − | '''پیغام سلطان شہید بہ رود کاویری'''
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| − | پیغام سلطان شہید بہ رود کاویری حقیقت حیات و مرگ و شہادت
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| − | رود کاویری یکی نرمک خرام
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| − | خستہ ئی شاید کہ از سیر دوام
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| − | در کہستان عمر ہا نالیدہ ئی
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| − | راہ خود را با مژہ کاویدہ ئے
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| − | اے مرا خوشتر ز جیحون و فرات
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| − | اے دکن را آب تو آب حیات
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| − | آہ شہرے کو در آغوش تو بود
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| − | حسن نوشین جلوہ از نوش تو بود
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| − | کہنہ گردیدی شباب تو ہمان
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| − | پیچ و تاب و رنگ و آب تو ہمان
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| − | موج تو جز دانہ گوہر نزاد
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| − | طرہ تو تا ابد شوریدہ باد
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| − | اے ترا سازی کہ سوز زندگی است
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| − | ہیچ میدانی کہ این پیغام کیست؟
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| − | آنکہ میکردی طواف سطوتش
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| − | بودہ ئی آئینہ دار دولتش
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| − | آنکہ صحرا ہا ز تدبیرش بہشت
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| − | آنکہ نقش خود بخون خود نوشت
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| − | آنکہ خاکش مرجع صد آرزوست
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| − | اضطراب موج تو از خون اوست
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| − | آنکہ گفتارش ہمہ کردار بود
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| − | مشرق اندر خواب و او بیدار بود
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| − | اے من و تو موجی از رود حیات
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| − | ہر نفس دیگر شود این کائنات
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| − | زندگانی انقلاب ہر دمی است
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| − | زانکہ او اندر سراغ عالمے است
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| − | تار و پود ہر وجود از رفت و بود
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| − | اینہمہ ذوق نمود از رفت و بود
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| − | جادہ ہا چون رھروان اندر سفر
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| − | ہر کجا پنھان سفر پیدا حضر
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| − | کاروان و ناقہ و دشت و نخیل
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| − | ہر چہ بینی نالد از درد رحیل
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| − | در چمن گل میہمان یک نفس
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| − | رنگ و آبش امتحان یک نفس
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| − | موسم گل ماتم و ہم نای و نوش
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| − | غنچہ در آغوش و نعش گل بدوش
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| − | لالہ را گفتم یکی دیگر بسوز
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| − | گفت راز ما نمی دانی ہنوز
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| − | از خس و خاشاک تعمیر وجود
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| − | غیر حسرت چیست پاداش نمود
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| − | در سراے ہست و بود آئی میا
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| − | از عدم سوے وجود آئی میا
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| − | ور بیائی چون شرار از خود مرو
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| − | در تلاش خرمنی آوارہ شو
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| − | تاب و تب داری اگر مانند مہر
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| − | پا بنہ در وسعت آباد سپہر
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| − | کوہ و مرغ و گلشن و صحرا بسوز
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| − | ماہیان را در تہ دریا بسوز
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| − | سینہ ئی داری اگر در خورد تیر
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| − | در جہان شاہین بزی شاہین بمیر
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| − | زانکہ در عرض حیات آمد ثبات
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| − | از خدا کم خواستم طول حیات
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| − | زندگی را چیست رسم و دین و کیش
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| − | یک دم شیری بہ از صد سال میش
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| − | زندگی محکم ز تسلیم و رضاست
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| − | موت نیرنج و طلسم و سیمیاست
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| − | بندۂ حق ضیغم و آہوست مرگ
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| − | یک مقام از صد مقام اوست مرگ
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| − | می فتد بر مرگ آن مرد تمام
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| − | مثل شاہینی کہ افتد بر حمام
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| − | ہر زمان میرد غلام از بیم مرگ
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| − | زندگی او را حرام از بیم مرگ
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| − | بندۂ آزاد را شأنے دگر
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| − | مرگ او را میدہد جانی دگر
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| − | او خود اندیش است مرگ اندیش نیست
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| − | مرگ آزادان ز آنی بیش نیست
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| − | بگذر از مرگی کہ سازد با لحد
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| − | زانکہ این مرگست مرگ دام و دد
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| − | مرد مومن خواہد از یزدان پاک
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| − | آن دگر مرگی کہ بر گیرد ز خاک
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| − | آن دگر مرگ انتہای راہ شوق
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| − | آخرین تکبیر در جنگاہ شوق
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| − | گرچہ ہر مرگ است بر مومن شکر
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| − | مرگ پور مرتضی چیزی دگر
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| − | جنگ شاہان جہان غارتگری است
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| − | جنگ مومن سنت پیغمبری است
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| − | جنگ مومن چیست ؟ ہجرت سوی دوست
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| − | ترک عالم اختیار کوی دوست
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| − | آنکہ حرف شوق با اقوام گفت
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| − | جنگ را رہبانی اسلام گفت
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| − | کس نداند جز شہید این نکتہ را
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| − | کو بخون خود خرید این نکتہ را
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