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| + | iiiii |
| − | '''طاسین زرتشت آزمایش کردن اہرمن زرتشت را'''
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| − | '''اہریمن'''
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| − | از تو مخلوقات من نالان چو نے
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| − | از تو ما را فرودین مانند دی
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| − | در جہان خوار و زبونم کردہ ئے
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| − | نقش خود رنگین ز خونم کردہ ئے
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| − | زندہ حق از جلوۂ سینای تست
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| − | مرگ من اندر ید بیضای تست
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| − | تکیہ بر میثاق یزدان ابلہی است
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| − | بر مرادش راہ رفتن گمرہی است
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| − | زھرہا در بادۂ گلفام اوست
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| − | ارہ و کرم و صلیب انعام اوست
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| − | جز دعاہا نوح تدبیری نداشت
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| − | حرف آن بیچارہ تأثیری نداشت
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| − | شہر را بگذار و در غاری نشین
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| − | ہم بہ خیل نوریان صحبت گزین
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| − | از نگاہی کیمیا کن خاک را
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| − | از مناجاتی بسوز افلاک را
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| − | در کہستان چون کلیم آوارہ شو
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| − | نیم سوز آتش نظارہ شو
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| − | لیکن از پیغمبری باید گذشت
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| − | از چنین ملا گری باید گذشت
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| − | کس میان ناکسان ناکس شود
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| − | فطرتش گر شعلہ باشد خس شود
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| − | تا نبوت از ولایت کمتر است
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| − | عشق را پیغمبری درد سر است
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| − | خیز و در کاشانۂ وحدت نشین
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| − | ترک جلوت گوی و در خلوت نشین
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| − | '''زرتشت'''
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| − | نور دریای است ظلمت ساحلش
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| − | ہمچو من سیلی نزاد اندر دلش
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| − | اندرونم موجہای بیقرار
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| − | سیل را جز غارت ساحل چہ کار
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| − | نقش بیرنگی کہ او را کس ندید
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| − | جز بخون اھرمن نتوان کشید
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| − | خویشتن را وانمودن زندگی است
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| − | ضرب خود را آزمودن زندگیست
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| − | از بلا ہا پختہ تر گردد خودی
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| − | تا خدا را پردہ در گردد خودی
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| − | مرد حق بین جز بحق خود را ندید
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| − | لاالہ می گفت و در خون می تپید
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| − | عشق را در خون تپیدن آبروست
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| − | ارہ و چوب و رسن عیدین اوست
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| − | در رہ حق ہر چہ پیش آید نکوست
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| − | مرحبا نامہربانیہای دوست
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| − | جلوۂ حق چشم من تنہا نخواست
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| − | حسن را بے انجمن دیدن خطاست
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| − | چیست خلوت درد و سوز و آرزوست
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| − | انجمن دید است و خلوت جستجو است
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| − | عشق در خلوت کلیم اللہی است
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| − | چون بجلوت می خرامد شاہی است
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| − | خلوت و جلوت کمال سوز و ساز
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| − | ہر دو حالات و مقامات نیاز
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| − | چیست آن بگذشتن از دیر و کنشت
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| − | چیست این تنہا نرفتن در بہشت
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| − | گرچہ اندر خلوت و جلوت خداست
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| − | خلوت آغازست و جلوت انتہاست
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| − | گفتہ ئی پیغمبری درد سر است
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| − | عشق چون کامل شود آدم گر است
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| − | راہ حق با کاروان رفتن خوش است
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| − | ہمچو جان اندر جہان رفتن خوش است
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