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| − | ==خطاب بہ مخدرات اسلام==
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| − | اے رد ایت پردۂ ناموس ما<br>
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| − | تاب تو سرمایۂ فانوس ما<br>
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| − | طینت پاک تو ما را رحمت است<br>
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| − | قوت دین و اساس ملت است<br>
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| − | کودک ما چون لب از شیر تو شست<br>
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| − | لاالہ آموختی او را نخست<br>
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| − | می تراشد مہر تو اطوار ما<br>
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| − | فکر ما گفتار ما کردار ما<br>
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| − | برق ما کو در سحابت آرمید<br>
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| − | بر جبل رخشید و در صحرا تپید<br>
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| − | اے امین نعمت آئین حق<br>
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| − | در نفسہای تو سوز دین حق<br>
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| − | دور حاضر تر فروش و پر فن است<br>
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| − | کاروانش نقد دین را رہزن است<br>
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| − | کور و یزدان ناشناس ادراک او<br>
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| − | ناکسان زنجیری پیچاک او<br>
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| − | چشم او بیباک و ناپرواستی<br>
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| − | پنجۂ مژگان او گیراستی<br>
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| − | صید او آزاد خواند خویش را<br>
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| − | کشتۂ او زندہ داند خویش را<br>
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| − | آب بند نخل جمعیت توئی<br>
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| − | حافظ سرمایۂ ملت توئی<br>
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| − | از سر سود و زیان سودا مزن<br>
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| − | گام جز بر جادۂ آبا مزن<br>
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| − | ہوشیار از دستبرد روزگار<br>
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| − | گیر فرزندان خود را در کنار<br>
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| − | این چمن زادان کہ پر نگشادہ اند<br>
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| − | ز آشیان خویش دور افتادہ اند<br>
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| − | فطرت تو جذبہ ہا دارد بلند<br>
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| − | چشم ہوش از اسوۂ زھرا مبند<br>
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| − | تا حسینی شاخ تو بار آورد<br>
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| − | موسم پیشین بگلزار آورد<br>
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