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| − | '''گردش در شہر مرغدین'''
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| − | مرغدین و آن عمارات بلند
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| − | من چہ گویم زان مقام ارجمند
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| − | ساکنانش در سخن شیرین جو نوش
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| − | خوب روی و نرم خوی و سادہ پوش
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| − | فکرشان بے درد و سوز اکتساب
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| − | رازدان کیمیای آفتاب
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| − | ہر کہ خواہد سیم و زر گیرد ز نور
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| − | چون نمک گیریم ما از آب شور
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| − | خدمت آمد مقصد علم و ہنر
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| − | کارہا را کس نمی سنجد بزر
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| − | کس ز دینار و درم آگاہ نیست
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| − | این بتان را در حرمہا راہ نیست
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| − | بر طبیعت دیو ماشین چیرہ نیست
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| − | آسمانہا از دخانھا تیرہ نیست
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| − | سخت کش دہقان چراغش روشن است
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| − | از نہاب دھخدایان ایمن است
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| − | کشت و کارش بے نزاع آب جوست
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| − | حاصلش بے شرکت غیری ازوست
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| − | اندر آن عالم نہ لشکر نے قشون
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| − | نے کسی روزی خورد از کشت و خون
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| − | نے قلم در مرغدین گیرد فروغ
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| − | از فن تحریر و تشہیر دروغ
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| − | نے بہ بازاران ز بیکاران خروش
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| − | نے صدا ہای گدایان درد گوش
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| − | '''حکیم مریخی'''
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| − | کس در اینجا سائل و محروم نیست
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| − | عبد و مولا حاکم و محکوم نیست
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| − | '''زندہ رود '''
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| − | سائل و محروم تقدیر حق است
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| − | حاکم و محکوم تقدیر حق است
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| − | جز خدا کس خالق تقدیر نیست
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| − | چارۂ تقدیر از تدبیر نیست
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| − | '''حکیم مریخی'''
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| − | گر ز یک تقدیر خون گردد جگر
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| − | خواہ از حق حکم تقدیر دگر
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| − | تو اگر تقدیر نو خواہی رواست
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| − | زانکہ تقدیرات حق لا انتہاست
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| − | ارضیان نقد خودی در باختند
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| − | نکتۂ تقدیر را نشناختند
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| − | رمز باریکش بحرفی مضمر است
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| − | تو اگر دیگر شوی او دیگر است
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| − | خاک شو نذر ہوا سازد ترا
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| − | سنگ شو بر شیشہ اندازد ترا
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| − | شبنمی؟ افتندگی تقدیر تست
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| − | قلزمی؟ پایندگی تقدیر تست
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| − | ہر زمان سازی ہمان لات و منات
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| − | از بتان جوئی ثبات اے بے ثبات"
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| − | تا بخود ناساختن ایمان تست
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| − | عالم افکار تو زندان تست
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| − | رنج بے گنج است تقدیر اینچنین
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| − | گنج بے رنج است تقدیر اینچنین
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| − | اصل دین این است اگر اے بیخبر،
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| − | می شود محتاج ازو محتاج تر
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| − | واے آن دینی کہ خواب آرد ترا
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| − | باز در خواب گران دارد ترا
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| − | سحر و افسون است یا دین است این
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| − | حب افیون است یا دین است این
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| − | می شناسی طبع دراک از کجاست
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| − | حوری اندر بنگہ خاک از کجاست
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| − | قوت فکر حکیمان از کجاست
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| − | طاقت ذکر کلیمان از کجاست
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| − | این دل و این واردات او ز کیست
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| − | این فنون و معجزات او ز کیست
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| − | گرمی گفتار داری از تو نیست
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| − | شعلہ کردار داری از تو نیست
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| − | اینہمہ فیض از بہار فطرت است
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| − | فطرت از پرودگار فطرت است
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| − | زندگانی چیست کان گوہر است
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| − | تو امینی صاحب او دیگر است
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| − | طبع روشن مرد حق را آبروست
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| − | خدمت خلق خدا مقصود اوست
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| − | خدمت از رسم و رہ پیغمبری است
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| − | مزد خدمت خواستن سوداگری است
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| − | ہمچنان این باد و خاک و ابر و کشت
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| − | باغ و راغ و کاخ و کوی و سنگ و خشت
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| − | اے کہ میگوئی متاع ما ز ماست
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| − | مرد نادان این ہمہ ملک خداست
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| − | ارض حق را ارض خود دانی بگو
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| − | چیست شرح آیۂ لاتفسدوا
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| − | ابن آدم دل بہ ابلیسی نھاد
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| − | من ز ابلیسی ندیدم جز فساد
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| − | کس امانت را بکار خود نبرد
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| − | ایخوش آنکو ملک حق با حق سپرد
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| − | بردہ ئی چیزی کہ از آن تو نیست
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| − | داغم از کاری کہ شایان تو نیست
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| − | گر تو باشی صاحب شی می سزد
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| − | ور نباشے خود بگو کی می سزد
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| − | ملک یزدان را بہ یزدان باز دہ
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| − | تا ز کار خویش بگشائی گرہ
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| − | زیر گردن فقر و مسکینی چراست
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| − | آنچہ از مولاست میگوئی ز ماست
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| − | بندہ ئی کز آب و گل بیرون نجست
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| − | شیشۂ خود را بہ سنگ خود شکست
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| − | ایکہ منزل را نمی دانی ز رہ
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| − | قیمت ہر شی ز انداز نگہ
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| − | تا متاع تست گوہر، گوہر است
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| − | ورنہ سنگ است از پشیزی کمتر است
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| − | نوع دیگر بین جھان دیگر شود
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| − | این زمین و آسمان دیگر شود
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