|
|
| Line 1: |
Line 1: |
| | <center> | | <center> |
| − | ==قل ہواللہ احد==
| |
| − |
| |
| − | من شبی صدیق را دیدم بخواب<br>
| |
| − | گل ز خاک راہ او چیدم بخواب<br>
| |
| − |
| |
| − | آن "امن الناس" بر مولای ما<br>
| |
| − | آن کلیم اول سینای ما<br>
| |
| − |
| |
| − | ہمت او کشت ملت را چو ابر<br>
| |
| − | ثانی اسلام و غار و بدر و قبر<br>
| |
| − |
| |
| − | گفتمش اے خاصۂ خاصان عشق<br>
| |
| − | عشق تو سر مطلع دیوان عشق<br>
| |
| − |
| |
| − | پختہ از دستت اساس کار ما<br>
| |
| − | چارہ ئی فرما پی آزار ما<br>
| |
| − |
| |
| − | گفت تا کی در ہوس گردی اسیر<br>
| |
| − | آب و تاب از سورۂ اخلاص گیر<br>
| |
| − |
| |
| − | اینکہ در صد سینہ پیچد یک نفس<br>
| |
| − | سری از اسرار توحید است و بس<br>
| |
| − |
| |
| − | رنگ او بر کن مثال او شوی<br>
| |
| − | در جہان عکس جمال او شوی<br>
| |
| − |
| |
| − | آنکہ نام تو مسلمان کردہ است<br>
| |
| − | از دوئی سوی یکی آوردہ است<br>
| |
| − |
| |
| − | خویشتن را ترک و افغان خواندہ ئی<br>
| |
| − | وای بر تو آنچہ بودی ماندہ ئی<br>
| |
| − |
| |
| − | وارہان نامیدہ را از نامہا<br>
| |
| − | ساز با خم در گذر از جامہا<br>
| |
| − |
| |
| − | اے کہ تو رسوای نام افتادہ ئی<br>
| |
| − | از درخت خویش خام افتادہ ئی<br>
| |
| − |
| |
| − | با یکی ساز از دوئی بردار رخت<br>
| |
| − | وحدت خود را مگردان لخت لخت<br>
| |
| − |
| |
| − | اے پرستار یکی گر تو توئی<br>
| |
| − | تا کجا باشی سبق خوان دوئی<br>
| |
| − |
| |
| − | تو در خود را بخود پوشیدہ ئی<br>
| |
| − | در دل آور آنچہ بر لب چیدہ ئی<br>
| |
| − |
| |
| − | صد ملل از ملتے انگیختی<br>
| |
| − | بر حصار خود شبیخون ریختی<br>
| |
| − |
| |
| − | یک شو و توحید را مشہود کن<br>
| |
| − | غائبش را از عمل موجود کن<br>
| |
| − |
| |
| − | لذت ایمان فزاید در عمل<br>
| |
| − | مردہ آن ایمان کہ ناید در عمل<br>
| |
| − | </center>
| |