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| − | ==حکایت شیر و شہنشاہ عالمگیر رحمةاﷲ علیہ==
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| − | شاہ عالمگیر گردون آستان<br>
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| − | اعتبار دودمان گورگان<br>
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| − | پایہ ی اسلامیان برتر ازو<br>
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| − | احترام شرع پیغمبر ازو<br>
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| − | در میان کارزار کفر و دین<br>
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| − | ترکش ما را خدنگ آخرین<br>
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| − | تخم الحادی کہ اکبر پرورید<br>
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| − | باز اندر فطرت دارا دمید<br>
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| − | شمع دل در سینہ ہا روشن نبود<br>
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| − | ملت ما از فساد ایمن نبود<br>
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| − | حق گزید از ہند عالمگیر را<br>
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| − | آن فقیر صاحب شمشیر را<br>
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| − | از پے احیاے دین مأمور کرد<br>
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| − | بہر تجدید یقین مأمور کرد<br>
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| − | برق تیغش خرمن الحاد سوخت<br>
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| − | شمع دین در محفل ما بر فروخت<br>
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| − | کور ذوقان داستانہا ساختند<br>
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| − | وسعت ادراک او نشناختند<br>
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| − | شعلہ ی توحید را پروانہ بود<br>
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| − | چون براہیم اندرین بتخانہ بود<br>
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| − | در صف شاہنشان یکتاستی<br>
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| − | فقر او از تربتش پیداستی<br>
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| − | روزے آن زیبندہ ی تاج و سریر<br>
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| − | آن سپہدار و شہنشاہ و فقیر<br>
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| − | صبحگاہان شد بہ سیر بیشہ ئی<br>
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| − | با پرستاری وفا اندیشہ ئی<br>
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| − | سر خوش از کیفیت باد سحر<br>
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| − | طایران تسبیح خوان بر ہر شجر<br>
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| − | شاہ رمز آگاہ شد محو نماز<br>
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| − | خیمہ بر زد در حقیقت از مجاز<br>
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| − | شیر ببر آمد پدید از طرف دشت<br>
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| − | از خروش او فلک لرزندہ گشت<br>
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| − | بوے انسان دادش از انسان خبر<br>
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| − | پنجہ عالمگیر را زد بر کمر<br>
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| − | دست شہ نادیدہ خنجر بر کشید<br>
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| − | شرزہ شیری را شکم از ھم درید<br>
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| − | دل بخود راہی نداد اندیشہ را<br>
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| − | شیر قالین کرد شیر بیشہ را<br>
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| − | باز سوے حق رمید آن ناصبور<br>
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| − | بود معراجش نماز با حضور<br>
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| − | این چنین دل خود نما و خود شکن<br>
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| − | دارد اندر سینہ ی مومن وطن<br>
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| − | بندہ ی حق پیش مولا لاستی<br>
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| − | پیش باطل از نعم بر جاستی<br>
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| − | تو ہم اے نادان دلی آور بدست<br>
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| − | شاہدی را محملی آور بدست<br>
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| − | خویش را در باز و خود را بازگیر<br>
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| − | دام گستر از نیاز و ناز گیر<br>
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| − | عشق را آتش زن اندیشہ کن<br>
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| − | روبہ حق باش و شیری پیشہ کن<br>
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| − | خوف حق عنوان ایمان است و بس<br>
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| − | خوف غیر از شرک پنہان است و بس<br>
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