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| − | '''در فن تعمیر مردان آزاد'''
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| − | یک زمان با رفتگان صحبت گزین
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| − | صنعت آزاد مردان ہم ببین
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| − | خیز و کار ایبک و سوری نگر
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| − | وا نما چشمی اگر داری جگر
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| − | خویش را از خود برون آوردہ اند
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| − | این چنین خود را تماشا کردہ اند
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| − | سنگہا با سنگہا پیوستہ اند
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| − | روزگاری را بہ آنی بستہ اند
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| − | دیدن او پختہ تر سازد ترا
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| − | در جھان دیگر اندازد ترا
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| − | نقش سوی نقشگر می آورد
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| − | از ضمیر او خبر می آورد
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| − | ہمت مردانہ و طبع بلند
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| − | در دل سنگ این دو لعل ارجمند
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| − | سجدہ گاہ کیست این از من مپرس
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| − | بی خبر روداد جان از تن مپرس
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| − | واے من از خویشتن اندر حجاب
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| − | از فرات زندگی ناخوردہ آب
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| − | واے من از بیخ و بن بر کندہ ئی
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| − | از مقام خویش دور افکندہ ئی
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| − | محکمی ہا از یقین محکم است
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| − | واے من شاخ یقینم بی نم است
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| − | در من آن نیروی الا اﷲ نیست
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| − | سجدہ ام شایان این درگاہ نیست
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| − | یک نظر آن گوھر نابی نگر
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| − | تاج را در زیر مہتابی نگر
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| − | مرمرش ز آب روان گردندہ تر
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| − | یک دم آنجا از ابد پایندہ تر
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| − | عشق مردان سر خود را گفتہ است
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| − | سنگ را با نوک مژگان سفتہ است
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| − | عشق مردان پاک و رنگین چون بہشت
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| − | می گشاید نغمہ ہا از سنگ و خشت
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| − | عشق مردان نقد خوبان را عیار
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| − | حسن را ھم پردہ در ہم پردہ دار
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| − | ہمت او آنسوی گردون گذشت
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| − | از جہان چند و چون بیرون گذشت
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| − | زانکہ در گفتن نیاید آنچہ دید
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| − | از ضمیر خود نقابی بر کشید
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| − | از محبت جذبہ ہا گردد بلند
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| − | ارج می گیرد ازو ناارجمند
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| − | بی محبت زندگی ماتم ھمہ
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| − | کاروبارش زشت و نامحکم ھمہ
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| − | عشق صیقل می زند فرہنگ را
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| − | جوہر آئینہ بخشد سنگ را
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| − | اھل دل را سینۂ سینا دہد
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| − | با ھنرمندان ید بیضا دہد
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| − | پیش او ہر ممکن و موجود مات
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| − | جملہ عالم تلخ و او شاخ نبات
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| − | گرمی افکار ما از نار اوست
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| − | آفریدن جان دمیدن کار اوست
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| − | عشق مور و مرغ و آدم را بس است
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| − | عشق تنہا ہر دو عالم را بس است
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| − | دلبری بی قاہری جادوگری است
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| − | دلبری با قاہری پیغمبری است
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| − | ہر دو را در کار ہا آمیخت عشق
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| − | عالمی در عالمی انگیخت عشق
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