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| − | '''موسیقی'''
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| − | مرگ ہا اندر فنون بندگی
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| − | من چہ گویم از فسون بندگی
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| − | نغمۂ او خالی از نار حیات
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| − | ہمچو سیل افتد بہ دیوار حیات
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| − | چون دل او تیرہ سیمای غلام
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| − | پست چون طبعش نواہای غلام
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| − | از دل افسردۂ او سوز رفت
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| − | ذوق فردا لذت امروز رفت
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| − | از نے او آشکارا راز او
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| − | مرگ یک شہر است اندر ساز او
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| − | ناتوان و زار می سازد ترا
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| − | از جہان بیزار می سازد ترا
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| − | چشم او را اشک پیہم سرمہ ایست
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| − | تا توانے بر نوای او مایست
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| − | الحذر این نغمۂ موت است و بس
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| − | نیستی در کسوت صوت است و بس
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| − | تشنہ کامی، این حرم بی زمزم است
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| − | در بم و زیرش ہلاک آدم است
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| − | سوز دل از دل برد غم میدہد
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| − | زہر اندر ساغر جم می دہد
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| − | غم دو قسم است اے برادر گوش کن
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| − | شعلۂ ما را چراغ ہوش کن
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| − | یک غم است آن غم کہ آدم را خورد
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| − | آن غم دیگر کہ ہر غم را خورد
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| − | آن غم دیگر کہ ما را ھمدم است
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| − | جان ما از صحبت او بی غم است
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| − | اندرو ہنگامہ ہای غرب و شرق
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| − | بحر و در وی جملہ موجودات غرق
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| − | چون نشیمن می کند اندر دلی
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| − | دل ازو گردد یم بی ساحلی
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| − | بندگی از سر جان نا آگہی است
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| − | زان غم دیگر سرود او تہی است
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| − | من نمیگویم کہ آہنگش خطاست
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| − | بیوہ زن را اینچنین شیون رواست
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| − | نغمہ باید تند رو مانند سیل
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| − | تا برد از دل غمان را خیل خیل
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| − | نغمہ می باید جنون پروردہ ئے
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| − | آتشے در خون و دل حل کردہ ئی
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| − | از نم او شعلہ پروردن توان
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| − | خامشی را جزو او کردن توان
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| − | می شناسی در سرود است آن مقام
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| − | کاندرو بی حرف می روید کلام
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| − | نغمۂ روشن چراغ فطرت است
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| − | معنی او نقشبند صورت است
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| − | اصل معنی را ندانم از کجاست
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| − | صورتش پیدا و با ما آشناست
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| − | نغمہ گر معنی ندارد مردہ ایست
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| − | سوز او از آتش افسردہ ایست
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| − | راز معنی مرشد رومی گشود
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| − | فکر من بر آستانش در سجود
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| − | معنی آن باشد کہ بستاند ترا
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| − | بی نیاز از نقش گرداند ترا
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| − | معنی آن نبود کہ کور و کر کند
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| − | مرد را بر نقش عاشق تر کند
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| − | مطرب ما جلوۂ معنی ندید
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| − | دل بصورت بست و از معنی رمید
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| − | '''مصوری'''
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| − | ہمچنان دیدم فن صورت گری
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| − | نے براہیمی درو نے آزری
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| − | راہبی در حلقۂ دام ہوس
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| − | دلبرے با طایرے اندر قفس
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| − | خسروے پیش فقیرے خرقہ پوش
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| − | مرد کوہستانیی ہیزم بدوش
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| − | نازنینی در رہ بتخانہ ئی
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| − | جوگئی در خلوت ویرانہ ئی
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| − | پیرکی از درد پیری داغ داغ
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| − | آنکہ اندر دست او گل شد چراغ
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| − | مطربی از نغمۂ بیگانہ مست
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| − | بلبلی نالید و تار او گسست
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| − | نوجوانے از نگاہی خوردہ تیر
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| − | کودکے بر گردن بابای پیر
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| − | می چکد از خامہ ہا مضمون موت
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| − | ہر کجا افسانہ و افسون موت
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| − | علم حاضر پیش آفل در سجود
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| − | شک بیفزود و یقین از دل ربود
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| − | بی یقین را لذت تحقیق نیست
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| − | بی یقین را قوت تخلیق نیست
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| − | بی یقین را رعشہ ہا اندر دل است
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| − | نقش نو آوردن او را مشکل است
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| − | از خودی دور است و رنجور است و بس
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| − | رہبر او ذوق جمہور است و بس
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| − | حسن را دریوزہ از فطرت کند
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| − | رہزن و راہ تہی دستی زند
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| − | حسن را از خود برون جستن خطاست
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| − | آنچہ می بایست پیش ما کجاست
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| − | نقشگر خود را چو با فطرت سپرد
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| − | نقش او افکند و نقش خود سترد
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| − | یک زمان از خویشتن رنگی نزد
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| − | بر زجاج ما گہی سنگی نزد
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| − | فطرت اندر طیلسان ہفت رنگ
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| − | ماندہ بر قرطاس او با پای لنگ
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| − | بی تپش پروانۂ کم سوز او
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| − | عکس فردا نیست در امروز او
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| − | از نگاہش رخنہ در افلاک نیست
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| − | زانکہ اندر سینہ دل بیباک نیست
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| − | خاکسار و بی حضور و شرمگین
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| − | بی نصیب از صحبت روح الامین
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| − | فکر او نادار و بی ذوق ستیز
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| − | بانگ اسرافیل او بی رستخیز
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| − | خویش را آدم اگر خاکی شمرد
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| − | نور یزدان در ضمیر او بمرد
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| − | چون کلیمی شد برون از خویشتن
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| − | دست او تاریک و چوب او رسن
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| − | زندگی بی قوت اعجاز نیست
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| − | ہر کسی دانندۂ این راز نیست
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| − | آن ہنرمندی کہ بر فطرت فزود
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| − | راز خود را بر نگاہ ما گشود
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| − | گرچہ بحر او ندارد احتیاج
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| − | میرسد از جوی ما او را خراج
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| − | چین رباید از بساط روزگار
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| − | ہر نگاہ از دست او گیرد عیار
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| − | حور او از حور جنت خوشتر است
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| − | منکر لات و مناتش کافر است
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| − | آفریند کائنات دیگری
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| − | قلب را بخشد حیات دیگری
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| − | بحر و موج خویش را بر خود زند
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| − | پیش ما موجش گہر می افکند
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| − | زان فراوانی کہ اندر جان اوست
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| − | ہر تہی را پر نمودن شأن اوست
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| − | فطرت پاکش عیار خوب و زشت
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| − | صنعتش آئینہ دار خوب و زشت
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| − | عین ابراھیم و عین آزر است
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| − | دست او ہم بت شکن ہم بتگر است
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| − | ہر بنای کہنہ را بر می کند
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| − | جملہ موجودات را سوہان زند
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| − | در غلامی تن ز جان گردد تہی
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| − | از تن بی جان چہ امید بہی
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| − | ذوق ایجاد و نمود از دل رود
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| − | آدمی از خویشتن غافل رود
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| − | جبرئیلی را اگر سازی غلام
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| − | بر فتد از گنبد آئینہ فام
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| − | کیش او تقلید و کارش آزری ست
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| − | ندرت اندر مذہب او کافری ست
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| − | تازگیہا وہم و شک افزایدش
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| − | کہنہ و فرسودہ خوش می آیدش
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| − | چشم او بر رفتہ از آیندہ کور
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| − | چون مجاور رزق او از خاک گور
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| − | گر ہنر این است مرگ آرزوست
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| − | اندرونش زشت و بیرونش نکوست
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| − | طایر دانا نمیگردد اسیر
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| − | گرچہ باشد دامی از تار حریر
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