|
|
| Line 1: |
Line 1: |
| − | <div dir="rtl">
| + | sdfsdf |
| − | '''سوال چہارم'''
| |
| − | | |
| − | | |
| − | قدیم و محدث از ہم چون جدا شد
| |
| − | | |
| − | کہ این عالم شد آن دیگر خدا شد
| |
| − | | |
| − | اگر معروف و عارف ذات پاکست
| |
| − | | |
| − | چہ سودا در سر این مشت خاکست
| |
| − | | |
| − | '''جواب'''
| |
| − | | |
| − | خودی را زندگی ایجاد غیر است
| |
| − | | |
| − | فراق عارف و معروف خیر است
| |
| − | | |
| − | قدیم و محدث ما از شمار است
| |
| − | | |
| − | شمار ما طلسم روزگار است
| |
| − | | |
| − | دمادم دوش و فردا می شماریم
| |
| − | | |
| − | بہ ہست و بود و باشد کار داریم
| |
| − | | |
| − | ازو خود را بریدن فطرت ماست
| |
| − | | |
| − | تپیدن نارسیدن فطرت ماست
| |
| − | | |
| − | نہ ما را در فراق او عیاری
| |
| − | | |
| − | نہ او را بی وصال ما قراری
| |
| − | | |
| − | نہ او بی ما نہ، بی او چہ حال است
| |
| − | | |
| − | فراق ما فراق اندر وصال است
| |
| − | | |
| − | جدائی خاک را بخشد نگاہی
| |
| − | | |
| − | دہد سرمایہ کوہی بکاہی
| |
| − | | |
| − | جدائی عشق را آئینہ دار است
| |
| − | | |
| − | جدائی عاشقان را سازگار است
| |
| − | | |
| − | اگر ما زندہ ایم از دردمندی است
| |
| − | | |
| − | وگر پایندہ ایم از دردمندی است
| |
| − | | |
| − | من و او چیست اسرار الہی است
| |
| − | | |
| − | من و او بر دوام ما گواہی است
| |
| − | | |
| − | بخلوت ہم بجلوت نور ذات است
| |
| − | | |
| − | میان انجمن بودن حیات است
| |
| − | | |
| − | محبت دیدہ ور بی انجمن نیست
| |
| − | | |
| − | محبت خود نگر بی انجمن نیست
| |
| − | | |
| − | بہ بزم ما تجلی ہاست بنگر
| |
| − | | |
| − | جہان ناپید و او پیداست بنگر
| |
| − | | |
| − | در و دیوار و شہر و کاخ و کو نیست
| |
| − | | |
| − | کہ اینجا ہیچکس جز ما و او نیست
| |
| − | | |
| − | گہی خود را ز ما بیگانہ سازد
| |
| − | | |
| − | گہی ما را چو سازی می نوازد
| |
| − | | |
| − | گہی از سنگ تصویرش تراشیم
| |
| − | | |
| − | گہی نادیدہ بر وی سجدہ پاشیم
| |
| − | | |
| − | گہی ہر پردۂ فطرت دریدیم
| |
| − | | |
| − | جمال یار بیباکانہ دیدیم
| |
| − | | |
| − | چہ سودا در سر این مشت خاکست
| |
| − | | |
| − | ازین سودا درونش تابناکست
| |
| − | | |
| − | چہ خوش سودا کہ نالد از فراقش
| |
| − | | |
| − | و لیکن ھم ببالد از فراقش
| |
| − | | |
| − | فراق او چنان صاحب نظر کرد
| |
| − | | |
| − | کہ شام خویش را بر خود سحر کرد
| |
| − | | |
| − | خودی را دردمند امتحان ساخت
| |
| − | | |
| − | غم دیرینہ را عیش جوان ساخت
| |
| − | | |
| − | گہر ہا سلک سلک از چشم تر برد
| |
| − | | |
| − | ز نخل ماتمی شیرین ثمر برد
| |
| − | | |
| − | خودی را تنگ در آغوش کردن
| |
| − | | |
| − | فنا را با بقا ہم دوش کردن
| |
| − | | |
| − | محبت در گرہ بستن مقامات
| |
| − | | |
| − | محبت در گذشتن از نہایات
| |
| − | | |
| − | محبت ذوق انجامی ندارد
| |
| − | | |
| − | طلوع صبح او شامی ندارد
| |
| − | | |
| − | براہش چون خرد پیچ و خمی ہست
| |
| − | | |
| − | جہانی در فروغ یکدمی ہست
| |
| − | | |
| − | ہزاران عالم افتد در رہ ما
| |
| − | | |
| − | بپایان کی رسد جولانگہ ما
| |
| − | | |
| − | مسافر جاودان زی جاودان میر
| |
| − | | |
| − | جہانی را کہ پیش آید فراگیر
| |
| − | | |
| − | بہ بحرش گم شدن انجام ما نیست
| |
| − | | |
| − | اگر او را تو در گیری فنا نیست
| |
| − | | |
| − | خودی اندر خودی گنجد محال است
| |
| − | | |
| − | خودی را عین خود بودن کمال است
| |
| − | </div>
| |