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| − | '''"تمہید"'''
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| − | ز جان خاور آن سوز کہن رفت
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| − | دمش واماند و جان او ز تن رفت
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| − | چو تصویری کہ بی تار نفس زیست
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| − | نمی داند کہ ذوق زندگی چیست
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| − | دلش از مدعا بیگانہ گردید
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| − | نے او از نوا بیگانہ گردید
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| − | بہ طرز دیگر از مقصود گفتم
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| − | جواب نامۂ محمود گفتم
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| − | ز عہد شیخ تا این روزگاری
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| − | نزد مردی بجان ما شراری
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| − | کفن در بر بخاکی آرمیدیم
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| − | ولی یک فتنۂ محشر ندیدیم
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| − | گذشت از پیش آن دانای تبریز
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| − | قیامتہا کہ رست از کشت چنگیز
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| − | نگاہم انقلابی دیگری دید
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| − | طلوع آفتابی دیگری دید
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| − | گشودم از رخ معنی نقابی
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| − | بدست ذرہ دادم آفتابی
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| − | نپنداری کہ من بی بادہ مستم
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| − | مثال شاعران افسانہ بستم
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| − | نبینی خیر از آن مرد فرو دست
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| − | کہ بر من تہمت شعر و سخن بست
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| − | بکوی دلبران کاری ندارم
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| − | دل زاری غم یاری ندارم
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| − | نہ خاک من غبار رہگذاری
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| − | نہ در خاکم دل بی اختیاری
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| − | بہ جبریل امین ھمداستانم
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| − | رقیب و قاصد و دربان ندانم
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| − | مرا با فقر سامان کلیم است
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| − | فر شاہنشہی زیر گلیم است
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| − | اگر خاکم بہ صحرائی نگنجم
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| − | اگر آبم بہ دریائے نگنجم
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| − | دل سنگ از زجاج من بلرزد
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| − | یم افکار من ساحل نورزد
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| − | نھان تقدیر ہا در پردۂ من
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| − | قیامت ہا بغل پروردۂ من
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| − | دمی در خویشتن خلوت گزیدم
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| − | جہانی لازوالی آفریدم
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| − | مرا زین شاعری خود عار ناید
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| − | کہ در صد قرن یک عطار ناید
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| − | بجانم رزم مرگ و زندگانی است
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| − | نگاہم بر حیات جاودانی است
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| − | ز جان خاک ترا بیگانہ دیدم
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| − | بہ اندام تو جان خود دمیدم
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| − | از آن ناری کہ دارم داغ داغم
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| − | شب خود را بیفروز از چراغم
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| − | بخاک من دلی چون دانہ کشتند
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| − | بہ لوح من خط دیگر نوشتند
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| − | مرا ذوق خودی چون انگبین است
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| − | چہ گویم واردات من ہمین است
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| − | نخستین کیف او را آزمودم
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| − | دگر بر خاوران قسمت نمودم
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| − | اگر این نامہ را جبریل خواند
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| − | چو گرد آن نور ناب از خود فشاند
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| − | بنالد از مقام و منزل خویش
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| − | بہ یزدان گوید از حال دل خویش
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| − | تجلی را چنان عریان نخواہم
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| − | نخواھم جز غم پنہان نخواہم
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| − | گذشم از وصال جاودانی
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| − | کہ بینم لذت آہ و فغانی
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| − | مرا ناز و نیاز آدمی دہ
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| − | بہ جان من گداز آدمی دہ
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