|
|
| Line 1: |
Line 1: |
| − | <div dir="rtl">
| + | dfsdfdf |
| − | '''سوال اول'''
| |
| − | | |
| − | نخست از فکر خویشم در تحیر
| |
| − | | |
| − | چہ چیز است آنکہ گویندش تفکر
| |
| − | | |
| − | کدامین فکر ما را شرط راہ است
| |
| − | | |
| − | چرا گہ طاعت و گاہی گناہ است
| |
| − | | |
| − | '''جواب'''
| |
| − | | |
| − | درون سینۂ آدم چہ نور است
| |
| − | | |
| − | چہ نور است این کہ غیب او حضور است
| |
| − | | |
| − | من او را ثابت سیار دیدم
| |
| − | | |
| − | من او را نور دیدم نار دیدم
| |
| − | | |
| − | گہی نازش ز برہان و دلیل است
| |
| − | | |
| − | گہی نورش ز جان جبرئیل است
| |
| − | | |
| − | چہ نوری جان فروزی سینہ تابی
| |
| − | | |
| − | نیرزد با شعاعش آفتابی
| |
| − | | |
| − | بخاک آلودہ و پاک از مکان است
| |
| − | | |
| − | بہ بند روز و شب پاک از زمان است
| |
| − | | |
| − | شمار روزگارش از نفس نیست
| |
| − | | |
| − | چنین جویندہ و یابندہ کس نیست
| |
| − | | |
| − | گہی واماندہ و ساحل مقامش
| |
| − | | |
| − | گہی دریای بی پایان بجامش
| |
| − | | |
| − | ہمین دریا ہمین چوب کلیم است
| |
| − | | |
| − | کہ از وی سینہ دریا دو نیم است
| |
| − | | |
| − | غزالی مرغزارش آسمانی
| |
| − | | |
| − | خورد آبی ز جوی کہکشانی
| |
| − | | |
| − | زمین و آسمان او را مقامی
| |
| − | | |
| − | میان کاروان تنھا خرامی
| |
| − | | |
| − | ز احوالش جہان ظلمت و نور
| |
| − | | |
| − | صدای صور و مرگ و جنت و حور
| |
| − | | |
| − | ازو ابلیس و آدم را نمودی
| |
| − | | |
| − | ازو ابلیس و آدم را گشودی
| |
| − | | |
| − | نگہ از جلوۂ او ناشکیب است
| |
| − | | |
| − | تجلی ہای او یزدان فریب است
| |
| − | | |
| − | بہ چشمی خلوت خود را ببیند
| |
| − | | |
| − | بہ چشمی جلوت خود را ببیند
| |
| − | | |
| − | اگر یک چشم بر بندد گناہی است
| |
| − | | |
| − | اگر با ہر دو بیند شرط راہی است
| |
| − | | |
| − | ز جوی خویش بحری آفریند
| |
| − | | |
| − | گہر گردد بہ قعر خود نشیند
| |
| − | | |
| − | ہمان دم صورت دیگر پذیرد
| |
| − | | |
| − | شود غواص و خود را باز گیرد
| |
| − | | |
| − | درو ہنگامہ ہای بی خروش است
| |
| − | | |
| − | درو رنگ و صدا بی چشم و گوش است
| |
| − | | |
| − | درون شیشۂ او روزگار است
| |
| − | | |
| − | ولی بر ما بتدریج آشکار است
| |
| − | | |
| − | حیات از وی بر اندازد کمندی
| |
| − | | |
| − | شود صیاد ہر پست و بلندی
| |
| − | | |
| − | ازو خود را بہ بند خود در آرد
| |
| − | | |
| − | گلوی ماسوا را ہم فشارد
| |
| − | | |
| − | دو عالم می شود روزی شکارش
| |
| − | | |
| − | فتد اندر کمند تابدارش
| |
| − | | |
| − | اگر این ھر دو عالم را بگیری
| |
| − | | |
| − | ہمہ آفاق میرد، تو نمیری
| |
| − | | |
| − | منہ پا در بیابان طلب سست
| |
| − | | |
| − | نخستین گیر آن عالم کہ در تست
| |
| − | | |
| − | اگر زیری ز خود گیری زبر شو
| |
| − | | |
| − | خدا خواہی بخود نزدیک تر شو
| |
| − | | |
| − | بہ تسخیر خود افتادی اگر طاق
| |
| − | | |
| − | ترا آسان شود تسخیر آفاق
| |
| − | | |
| − | خنک روزی کہ گیری این جہان را
| |
| − | | |
| − | شکافی سینہ نہ آسمان را
| |
| − | | |
| − | گذارد ماہ پیش تو سجودی
| |
| − | | |
| − | برو پیچی کمند از موج دودی
| |
| − | | |
| − | درین دیر کہن آزاد باشے
| |
| − | | |
| − | بتان را بر مراد خود تراشی
| |
| − | | |
| − | بکف بردن جہان چار سو را
| |
| − | | |
| − | مقام نور و صوت و رنگ و بو را
| |
| − | | |
| − | فزونش کم کم او بیش کردن
| |
| − | | |
| − | دگرگون بر مراد خویش کردن
| |
| − | | |
| − | بہ رنج و راحت او دل نبستن
| |
| − | | |
| − | طلسم نہ سپہر او شکستن
| |
| − | | |
| − | فرورفتن چو پیکان در ضمیرش
| |
| − | | |
| − | ندادن گندم خود با شعیرش
| |
| − | | |
| − | شکوہ خسروی این است این است
| |
| − | | |
| − | ہمین ملک است کو توام بدین است
| |
| − | </div >
| |